बारिश और तुम्हारी यादें

अभी कल ही बंगलोर में बारिश हुई..तो कल शाम में ऐसे ही कुछ लिख दिया था …अब मैं कोई कवी या शायर तो नहीं लेकीन जो भी थोडा बहुत लिखा है, आप सब के सामने पेश है…इन लब्जों में मेरे कुछ पल कैद हैं.ऐसे पल जो मैं कभी भुल नहीं सकता..
 
 कल फिर यहाँ बारिश हुई
कल फिर तुम याद आये,
और साथ ही याद आया
बारिश का वो सुहाना मौसम
जब हम भीगे हुए से
सड़को पे चलते थे…
पानी के कूदती तुम छप छप चलती थी..
बारिश की बूँदें तुम्हारे चेहरे को छु जाती थी
भीगा हुआ सा वो चेहरा तुम्हारा,
आज भी रातों जगाता है मुझे…
 
रिमझिम बारिश में हम घूमते,
इधर उधर फिर करते ,
और थक के उस पार्क में जा बैठते हम,
उस पार्क में एक कोने में लगी बेंच
आज भी तुम्हारा इंतज़ार कर हैं हो जैसे
और उसी पार्क के गेट पे
आज भी वो आइसक्रीम की दुकान है,
जहाँ  हर बारिश में ,
तुम्हें  आइसक्रीम खाना बड़ा पसंद था..
 
आज  भी कभी कभी वो पेड़ याद आ जाता है
जो उस रास्ते पे हुआ करता था
जहाँ  हम मिला करते थे…
बारिशों में तो जैसे 
उस  पेड़ के फूलों में निखर आ जाता था..
तुम  उस पेड़ पे झूलती,उसके फूलों से खेलती 
और  कहती मुझसे
सावन से अच्छा कोई मौसम नहीं..
 
जब  कभी हम शाम की बारिश में फंस जाते
तुम  मुझे बताया करती ,
की  क्या सुहानी बात है इस बारिश में,
और  मैं तुम्हारी उन बातों में डूब जाया करता था..
बारिश के शामों में आसमान कितना हसीन दीखता है,
तुमसे ही जाना मैंने…
 
ये सब बातें, और भी कई बातें 
जो तुमने कही थी
याद है मुझे…
कैसे भुल सकता हूँ ये सब हसीन पल
की हर पल में तुम हो, तुम्हारी यादें हैं..
ये बारिशें अब अक्सर मुझे रुला जाया करती हैं..
इन बारिशों में तुम्हारी कमी बहुत खलती है..
तुम्हारी यादें आती हैं…
तुम याद बहुत आते हो..
Abhihttps://www.abhiwebcafe.com
इस असाधारण सी दुनिया में एक बेहद साधारण सा व्यक्ति हूँ. बस कुछ सपने के पीछे भाग रहा हूँ, देखता हूँ कब पूरे होते हैं वो...होते भी हैं या नहीं! पेशे से वेब और कंटेंट डेवलपर, और ऑनलाइन मार्केटर हूँ. प्यारी मीठी कहानियाँ लिखना शौक है.

8 COMMENTS

  1. बहुत सुंदर
    मातृ दिवस के अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनायें और मेरी ओर से देश की सभी माताओं को सादर प्रणाम |

  2. बहुत अच्छा लिखे हैं … लेकिन दू बात का ध्यान रखिए ..बड़ा हैं इसलिए सलाह दे रहे हैं… पहिला पोस्ट करने से पहिले पढ कर दोहरा लीजिए..इससे गलती पता चल जाता है जो पढते टाईम नहीं अखरता है… अऊर मात्रा का खयाल रखिए.. कऊन कहता है कि आप कवि नहीं हैं… एतना सुंदर भाव लिखे हैं कि बताना मोस्किल है..

  3. जी अंकल…आपकी सलाह को जरूर ध्यान में रखेंगे हम….
    हम हिंदी के मात्रा में बचपन से कमजोर रहे हैं, स्पेल्लिंग मिस्टेक बहुत होती थी.. 🙂 पूरी कोशिश रहेगी सुधरने की…

    और आप बड़े हैं, तुम कह के पुकारिए अच्छा रहेगा…आपने ही कहा बड़ा हैं इसलिए सलाह दे रहे हैं….इसीलिए कहा आपको…की तुम कह के ही संबोधित करें हमें….

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