खामोश रात

ये रात कितनी खामोश है
ये रात कितनी तनहा..
इस  सर्द रात में,
कुछ लम्हे आते,जाते हैं आँखों में…
दिल की धड़कने भी,
इस रात के सन्नाटे में..
एक अजीब आवाज़ कर रही हो जैसे…
तुम्हारा नाम ले रही हो जैसे…
तुम्हे पुकार रही हो जैसे…

नींद तो रूठी हुई है आज..
आज वो नहीं आएगी…
मैं कभी इस करवट, कभी उस करवट
नींद को मानाने की नाकाम कोशिशें करता रहता हूँ..

आज की ये रात बड़ी बेरहम रात है…
इस रात के सीने में दिल ही नहीं…
आँखों में लगातार चुभ रहे हैं,
वो  अधूरे जज़्बात, वो अधूरी कहानी..
सारी बातें आज इस तनहा रात में,
क्यूँ याद आ रही हैं मुझे..
वो  यादें ऐसे चुभ रही हैं आज,
जैसे टूटे शीशे चुभे हों दिल में कहीं..धंस गए हो..
और बूँद बूँद लहू गिर रही हो …

इस बेरहम सर्द,तनहा रात में..
दर्द बढ़ने लगा है,गम सुलगने लगा है…

Abhihttps://www.abhiwebcafe.com
इस असाधारण सी दुनिया में एक बेहद साधारण सा व्यक्ति हूँ. बस कुछ सपने के पीछे भाग रहा हूँ, देखता हूँ कब पूरे होते हैं वो...होते भी हैं या नहीं! पेशे से वेब और कंटेंट डेवलपर, और ऑनलाइन मार्केटर हूँ. प्यारी मीठी कहानियाँ लिखना शौक है.

10 COMMENTS

  1. सारी बातें आज इस तनहा रात में,
    क्यूँ याद आ रही हैं मुझे..
    वो यादें ऐसे चुभ रही हैं आज,
    जैसे टूटे शीशे चुभे हों दिल में कहीं..धंस गए हो..
    और बूँद बूँद लहू गिर रही हो …

    बेशक बहुत सुन्दर लिखा और सचित्र रचना ने उसको और खूबसूरत बना दिया है.

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