मीना कुमारी की शायरी – पार्ट २

सच
यह तुलसी* कैसी शांत है
और काश्मीर की झीलें 
किस किस तरह 
उथल पुथल हो जाती हैं
और अल्लाह !
मैं !


*तुलसी – मुंबई से कुछ दूर तुलसी नाम की एक झील है 

कुछ आजाद नगमें…. मीना कुमारी जी के कुछ दर्द …मीना कुमारी जी के कुछ नगमे आपने इस पोस्ट में देखें होंगे, उसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए ये पार्ट २ ला रहा हूँ मैं. थोड़ी देरी से आई ये पार्ट २ , लेकिन ये वादा है पार्ट ३ में कोई देरी नहीं होगी 🙂 मीना कुमारी जी की शायरी हमें बहुत भाती है, उनकी दो किताबें भी अपने पास हैं 🙂 उन्ही किताबों के कुछ पन्ने पेश कर रहा हूँ ..

लम्हे 

कई लम्हे 
बरसात की बूंदे हैं 
नाकाबिले-गिरफ्त*
सीने पे आकार लगते हैं 
और हाथ बढ़ा 
की इससे पहले 
फिसल कर टूट जाते हैं

*नाकाबिले-गिरफ्त-जो पकड़े न जा सकते हों.

एक  गज़ल

टुकड़े-टुकड़ेदिन बीता, धज्जी-धज्जी रात मिली 
जितना जितना आँचल था, उतनी ही सौगात मिली .


रिमझिम रिमझिम बूंदों में, जहर भी है और अमृत भी ..
आँखें हंस दी,दिल रोया, ये अच्छी बरसात मिली..


जब चाहा दिल को समझें, हँसने की आवाज़ सुनी..
जैसे कोई कहता हो, ले फिर तुझको मात मिली..


मातें कैसी  घातें क्या , चलते रहना आठ पहर,
दिल-सा साथी जब पाया, बेचैनी भी साथ मिली..


होठों तक आते आते, जाने कितने रूप भरे 
जलती-बुझती आँखों में,सादा-सी जो बात मिली..

चलते चलते दो लाइन और सुनाना चाहूँगा..

खुद में 
महसूस हो रहा है 
जो 
खुद से बाहर 
तलाश है उसकी..
Abhihttps://www.abhiwebcafe.com
इस असाधारण सी दुनिया में एक बेहद साधारण सा व्यक्ति हूँ. बस कुछ सपने के पीछे भाग रहा हूँ, देखता हूँ कब पूरे होते हैं वो...होते भी हैं या नहीं! पेशे से वेब और कंटेंट डेवलपर, और ऑनलाइन मार्केटर हूँ. प्यारी मीठी कहानियाँ लिखना शौक है.

11 COMMENTS

  1. बहुत खूब,
    टुकडे टुकडे दिन बीता का आडियो है आपके पास खुद मीना कुमारी की आवाज में?
    न हो, तो बताना हम भेज देंगे।

  2. अरे साहब भेजिए हमें…हमारे पास ऑडियो नहीं है…इस पते पे मेल कर दीजिये
    [email protected]
    मजा आ जायेगा कसम से 🙂

  3. waah kya khoob maja aa gaya meena kumari ki collection main dhoondhta hoon to yahan milta hi nahi yaar abhi agar ho sake to patna aate waqt mere lie kuch le aana

  4. ठीक है, थोडा समय दो क्योंकि याद नहीं किस मशीन/हार्डड्राईव पर आडियो पडा हुआ है। हुआ तो १-२ दिन में ईमेल कर दिया जायेगा वरना खोजने में हफ़्ते भी लग सकते हैं (प्रशान्त से पूछना हमारी भूलने की आदत), लेकिन खोजकर ईमेल जरूर करेंगे। थोडा सब्र रखना 😉

    नीरज

  5. मीनाजी को मैंने खूब पढ़ा है।
    जिस तरह का दर्द लेकर वे निजी जीवन को जीती थीं वहीं दर्द उनकी रचनाओं में दिखाई देता है।

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