चिट्ठी

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तुम्हे भूल पाना कब आसान रहा है.जब भी कोशिश करता हूँ नाकाम ही होता हूँ.कोई अपने जिंदगी के सबसे खूबसूरत इग्यारह साल कैसे भुला सकता है, चाह के भी मुमकिन नहीं है.इन इग्यारह सालों में जिंदगी के हर छोटे बड़े फैसलों पर जिस शख्स के सहमति से मुहर लगती थी, उसे भुला पाना  बड़ा ही मुश्किल काम है.कुछ मेरे बहुत ही अच्छे दोस्त हैं, जो मेरी सच में फ़िक्र करते हैं, वो कहते हैं की अब तुम्हे भूल जाना ही मेरे लिए अच्छा है.लेकिन तुम कोई खिलौना तो नहीं, की अगर मेरे से अलग हो गयी तो मैं दिल बहलाने के लिए एक नया खिलौना लेते आऊं और तुम्हे बिलकुल भूल जाऊं? लोग कहते हैं की तुम्हे याद करूँगा, तो मुझे तकलीफ ही होगी.उन्हें मैं कैसे समझाऊं की की तुम्हे याद करने से हमेशा मुझे खुशी ही मिली है.जिस दिन तुम्हारी शरारती और कन्फ्यूज़्ड बातें याद आती है तो चेहरा खुद ब खुद खिल जाता है…उस समय दुःख,दर्द या तकलीफ कहीं आसपास भी नहीं फटकते..वे सुख के पल होते हैं जब मैं खुद को बेहद खुश और हल्का महसूस करता हूँ.
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यहाँ सर्दियाँ शुरू हो गयी हैं..मौसम बड़ा ही खूबसूरत हो गया है, एकदम वैसा ही जैसा की तुम्हे पसंद है.पुरे दिन हलकी बारिश होते रहती है..याद है न तुम्हे, जब भी सर्दियों में बारिश होती थी तो तुम बहुत खुश हो जाया करती थी.तुम्हारी दो फेवरिट जैकेट थी.एक तो वो ‘कुछ कुछ होता है’ फिल्म से इंस्पायर्ड ‘गैप’ वाली जैकेट और दूसरी ब्लैक वाली जैकेट जो तुम्हे सबसे ज्यादा पसंद थी.तुम उस ब्लैक जैकेट को अक्सर पहनती थी और कहती थी..”देखो, इसमें मैं कितनी क्यूट लगती हूँ…जस्ट लाईक अ पेन्गुईन”.मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ था जब बहुत सालों बाद फेसबुक पर तुम्हारी एक फोटो में किसी ने कमेन्ट में लिखा था -‘आप बिलकुल पेन्गुईन के जैसी दिख रही हो’.उस समय मैंने सोचा की हो सकता है तुमने उसे ये बात कभी बताई हो और वो बस युहीं तुम्हे छेड़ने के लिए ये कमेन्ट लिख गयी.लेकिन अगर तुमने उसे ये बात कभी नहीं बताई तो तुम्हे खुद उसके उस कमेन्ट पर बेहद आश्चर्य हुआ होगा. 
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हमने एक लिस्ट बनाई थी, बहुत साल पहले.उस लिस्ट में हमने उन सब जगहों के बारे में लिखा था जहाँ हम साथ जाना चाहते थे.उनमे से एक जगह थी “ज़ुरिक”.हमने ये तय किया था इन जगहों पर अगर हम जायेंगे तो साथ जायेंगे वरना कभी नहीं जायेंगे..लेकिन एक दफे पटना आने के क्रम में तुम ये वादा तोड़ते हुए ज़ुरिक चली गयी, और वहाँ से तुमने मुझे फोन किया था -“तेरे से किया प्रोमिस तोड़ रही हूँ, बता क्या कर लेगा’..तुमने फोन पर उस समय इतना इरिटेट कर दिया था की मुझे बड़ा गुस्सा आ रहा था और गलती से अगर उस समय तुम सामने  आ जाती तो मेरे पाँचों उँगलियों के निसान तुम्हारे नर्म,गुलाबी, मुलायम गालों पर छप जाते.फिर तुमने मुझे फोन पर सान्तवना देते हुए कहा की इंडिया आते वक्त तुम मेरे लिए वहाँ के चोकलेट लेते आओगी.तुमने अपना वादा तो पूरा जरूर किया लेकिन मेरे लिए बस एक चोकलेट लायी, और उसे मुझे देने के बाद मेरे से छीन कर खुद खा गयी.
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याद है एक दिन सुबह तुमने मुझे बड़ा लंबा ई-मेल किया था और बताया था की तुम्हारे शहर में बहुत बर्फ गिरी थी और शाम में तुम अपनी छोटी बहनों के साथ घर के सामने वाली बेंच पर बैठ के सर्दियों में चोकलेट और आइसक्रीम के डेडफुल कॉम्बीनेसन के मजे ले रही थी.उस दिन मेरे शहर में सुबह से ही बारिश हो रही थी, और मैं बहुत देर तक तुम्हारे मेल के बारे में सोचता रहा.मैं सपने देखने लगा की काश कभी ऐसा हो की मैं तुम्हे बिना बताये, तुम्हारे शहर में आ जाऊं और तुम्हारे घर के बाहर लगी किसी बेंच पर बैठ के तुम्हारे बाहर निकलने का इंतज़ार करूँ.तुम घर से बाहर कदम निकालो और धुप की किरण तुम्हारे चेहरे को धीरे से आकार छुए.मैं दूर से बस तुम्हे देखता रहूँ और फिर तुम्हे खबर किये बिना तुम्हारे पीछे पीछे पूरा शहर घूमता रहूँ, जहाँ भी तुम जाओ.फिर जब शाम में तुम अपनी फेवरिट कॉफी-शॉप में बैठ कर ‘मिल्स एंड बन्स’ टाईप कोई नॉवेल पढ़ रही हो तो मैं चुपके से तुम्हारे पास आकार तुम्हारे कानों में “आई लव यू” बोल के हल्के से तुम्हारे गालों को चूम लूँ.तुम्हारा इक्स्प्रेशन उस समय बिलकुल तुम्हारे स्टाईल का अपने आप में यूनिक वाला होगा.मैं वो पल महसूस कर सकता हूँ जब तुम ‘ओ माई गॉड’ चिल्लाकर कुछ पल मेरे तरफ अविश्वास से देखोगी, की क्या ये मैं ही हूँ और फिर मेरे गले लग जाओगी.

26 COMMENTS

  1. उफ़ क्या कहूँ ..तुम्हारी इन चिट्ठियों पर तो मैं एकदम निशब्द हो जाती हूँ.इतनी शिद्दत से डूब कर लिखते हो न …इन्हें संभाल कर रखना और एक दिन एक पुस्तक का रूप देना ….

  2. ओह अभिषेक, तुम कितनी अच्छी चिट्ठियाँ लिखते हो…
    भूलने की जहां तक बात है, मुझे ऐसा लगता है कि किसी के बस में नहीं होता। जैसे प्यार होता है तो आप रोक नहीं सकते हो उसी तरह याद आने को भी आप रोक नहीं सकते…चाह कर भूल जाना एक ऐसा झूठ है जो दुनिया में सब सब से बोलते हैं। कोई किसी को कभी कोशिश कर के भूलता नहीं। दिल में दराजें उगती जाती हैं और हम उन दराजों में यादें सकेरते जाते हैं…कुछ कहीं नहीं जाता। सब वहीं रहता है, अपनी जगह पर…कभी कोई मौसम टहक जाता है तो याद के जख्म गहरा जाते हैं। पर वाकई…याद हमेशा उदास थोड़े ही करती है। अब बताओ, बैंग्लोर की सड़कों पर इस खूबसूरत मौसम में पैदल टहलते हुये, तुम अगर हल्के हल्के मुस्कुरा रहे हो…तो याद के कारण ही न?

    तुम्हारी चिट्ठी दिल को छू गयी…एकदम मन से लिखी, सिम्पल, सादी, पारदर्शी। ज्यूरीक बड़ा खूबसूरत शहर है, वहाँ जाने का वादा तोड़ने के लिए उससे गुस्सा मत हो…वो भले तुम्हारे साथ न गयी हो, तुम्हारी याद बेतरह आई होगी उसे। और याद में साथ रहना, सच में साथ रहने से कम थोड़े ही होता है।
    बहुत बकबक कर गयी…सॉरी…आदत है, प्यार को लेकर इतना प्यारा कुछ पढ़ती हूँ तो रोक नहीं पाती खुद को।

  3. @पूजा,
    शुक्रिया…बहुत ही मीठी, अच्छी बातें आप कह गयीं..
    इस तरह के बकबक के लिए सॉरी कहना उचित नहीं…ये तो बहुत प्यारी बकबक लगी मुझे!!! 🙂

    @गीता,
    बहुत बहुत शुक्रिया!

    @शिखा दी,
    ह्म्म्म 🙂

  4. मेरे भाई तुम्हारे शब्द सीधे दिल में दस्तक देते हैं.
    और पूजा जी का बकबक वाकई काबिले तारीफ़ है. वो आखरी वाला पाराग्राफ में एक अजीब कशिश है एहसास है जो जो जो simply great है.

    तुम्हारे कुछ ऐसे पोस्ट हैं जिसे पढकर ऐसा महसूस होता है की जैसे मैं वहाँ खरा सब कुछ देख रहा हूँ ये भी उसमें से एक पोस्ट है यारा…..

  5. तुम्हारा यह ब्लॉग एकदम अहसासों से लबालब है….. कोई भी बह जाएगा जाएगा जैसे कि मैं अभी इस पल मे…. तुम्हारी चिट्ठियाँ अनमोल चिट्ठियाँ … फोटो सभी एकदम दिल को छु लेनेवाले……

  6. Kya kahun, aap bade hain..Koi apne un palon ko nhi bhula sakta jisse usne jiya jo aur na hi us insaan ko jiske saath wo pal jiye hon..par wawt badalta hai..Log badalte hain.. aur agar aap abhi bhi un yaadon mein khoye ho to ye sach hi hoga ki shayad aap me abhi bhi wo chahat hai kisi ko paane ki..mere jaise log bahut ego waale hote hain..humme agar ek tarfaa pyaar ho aur humme aaisa pta chale to hum piche hatna shuru hojaate hain..Mein aasha aur prarthana dono karungi ki aapko aapki is chahat ka fal zarur mile ek din..
    Baaki rahi chithiyon ki baatein..to mein sach kehti hun..mein sirf aur sirf aapka blog seriously padti hun..Bht hi simple aur sachaa..hamesha ek innocence factor raha hai aur rehna bhi chahiye..Bahut badiya..Lage raho..Khush raho.!!

  7. Kya kahun, aap bade hain..Koi apne un palon ko nhi bhula sakta jisse usne jiya jo aur na hi us insaan ko jiske saath wo pal jiye hon..par wawt badalta hai..Log badalte hain.. aur agar aap abhi bhi un yaadon mein khoye ho to ye sach hi hoga ki shayad aap me abhi bhi wo chahat hai kisi ko paane ki..mere jaise log bahut ego waale hote hain..humme agar ek tarfaa pyaar ho aur humme aaisa pta chale to hum piche hatna shuru hojaate hain..Mein aasha aur prarthana dono karungi ki aapko aapki is chahat ka fal zarur mile ek din..
    Baaki rahi chithiyon ki baatein..to mein sach kehti hun..mein sirf aur sirf aapka blog seriously padti hun..Bht hi simple aur sachaa..hamesha ek innocence factor raha hai aur rehna bhi chahiye..Bahut badiya..Lage raho..Khush raho.!!

  8. beautifully written 🙂

    one thing i want to say..
    i believe in it..

    choti choti baaton se relationship emotional banti hai.. strong nahin.. 🙂

    i hope you are getting what i want to say bhaiya! 🙂

  9. chithhi bht pehle padh li thi … par comment nahi kar paya ..>!!!!

    i feel privileged tht i can read these letters written by u … and also respect u for being such a dedicated person … ! 🙂

    keep writing ur heart .. !

  10. अभि , अगर मैं भी कहूँ … कुछ भी कहने के लिए मुझे भी शब्द खोजना पड़ रहा है तो ये मत कहना कि तुम्हारा नक़ल कर रही हूँ . मतलब मैं तुम्हारी इस चिट्ठी की तारीफ़ में कुछ नहीं कहने वाली……… भर लेना .

  11. मैं अकेला नहीं
    बीता वक़्त, टूटे वादे
    और वे अमिट यादें
    इन सब में
    तुम समाये रहते हो
    जानता हूँ कि
    तुम्हारी नितांत अपनी
    एक दुनिया है
    मुझसे अलग, मुझसे दूर
    फिर भी
    दुःख, पीड़ा या खालीपन
    दूर-दूर तक नहीं होते
    केवल सुख होता है
    जब मेरे तसव्वुर में होते हो
    तुम!
    _

  12. तुम 'ओ माई गॉड' चिल्लाकर कुछ पल मेरे तरफ अविश्वास से देखोगी, की क्या ये मैं ही हूँ और फिर मेरे गले लग जाओगी…|

    सच्ची…ये तुम ही हो न…? 😛
    वैसे लिस्ट बनाने वाली बात से हमें भी कुछ याद सा आ गया…जाने क्यों…|

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