देखो रूठा न करो…

उन दोनों की जोड़ी कमाल की थी, जहाँ एक तरफ लड़का शर्मीला और कम बोलने वाला था, वहीँ दूसरी तरफ लड़की बिंदास और हमेशा नयी शरारतें करने वाली.लड़की को सबसे ज्यादा चिढ़ लड़का के कम बोलने वाले ऐटिटूड से थी..वो हमेशा इस बात से चिढती थी, की लड़का उससे खुल कर प्यार जताने में हिचकता है, खतों में लाख वो अपना प्यार दिखाए…उसके लिए कवितायें लिखे लेकिन कभी लड़की के सामने खुल कर प्यार नहीं जताता था.लड़की कहती उससे “काश कभी तुम अपनी मर्ज़ी से भी कुछ प्यार भरी बातें मुझसे कर लिया करो…” लड़का इस बात का कोई जवाब नहीं देता, और तब लड़की रूठ जाया करती थी.फिर लड़का उसे मनाता, उसकी हर फरमाईश पूरा करता और अंत में लड़की लड़का से वो सब कहलवा लेती जो वो सुनना चाहती!लड़की के पास कई ट्रिक्स होते थे, जिन्हें वो लड़के पर आजमाती थी और लगभग हमेशा उसे कामयाबी मिल ही जाया करती थी.वो पूरी प्लानिंग के साथ अपने ट्रिक्स को एक्सक्यूट करती थी..कहीं कोई मिस्टेक नहीं.लडक के जवाब पर भी उसका कंट्रोल होता था.उसे पता रहता हमेशा की कौन सी बात कहने पर लड़का कौन सा जवाब देगा..और वो इन्ही सब बातों के आधार पर अपना कंवरसेसन पहले से प्लान कर लिया करती थी.लड़की को गाने का शौक था, वो हमेशा उसे अपने पसंदीदा गाने गाकर लड़के को सुनाती थी.एक तरह से उसके ट्रिक गानों में ही छुपे होते थे.

वो जुलाई का कोई दिन था.दोनों अलग अलग शहरों में रह रहे थे, और दोनों के शहर में बारिश हो रही थी, एक ही वक़्त.दोनों एक दुसरे से बात कर रहे थे, फोन पर नहीं बल्कि फेसबुक चैट पर.लड़की को अचानक याद आया की पहले जिस दिन भी बारिश होती थी, वो लड़के के साथ अन्ताक्षरी खेलती जरूर खेलती थी.ये लड़की ने एक नियम सा बना रखा था.बारिशों के मौसम के ऐसे कई नियम लड़की ने बनाये थे.लड़का हमेशा अन्ताक्षरी खेलने से बचना चाहता था..लड़के की दो वजहें थी..एक तो ये की लड़की का नियम था, की पुरे सुर में वो गाकर लड़की के गाने का जवाब दे.अन्ताक्षरी से घबराने की लड़के की दूसरी वजह थी लड़की की गुंडागर्दी.अन्ताक्षरी के दौरान अगर लड़के को ‘ह’ से कोई गाना गाना होता और वो जो भी गाना चुनता गाने के लिए, लड़की फौरन कहती “नहीं तुम इसे नहीं गा सकते, ये मेरा फेवरिट है, मैं गाऊँगी जब मुझे ‘ह’ से गाना गाना होगा…तुम कोई दूसरा गाना चुन लो”.लड़की के तो कई गाने फेवरिट थे, और लड़के के हर गाने पर लड़की को ऐतराज़ था..”नहीं ये भी नहीं, दूसरा गाना गाओ…” इस गुंडागर्दी से परेसान लड़का कभी अन्ताक्षरी में जीत नहीं पाता था..और जब लड़की जीत जाया करती थी, तो अक्सर लड़का को उसकी जीत सेलिब्रेट करने के लिए उसे समोसे और कोल्डड्रिंक खिलानी पड़ती थी.कभी अगर लड़का गलती से जीत गया, तो लड़के की मुश्किलें और बढ़ जाया करती थी…उसे लड़की को मानना पड़ता, ये कहना पड़ता…की उसने चीटिंग की है, तभी वो जीता है….और अंत में लड़की का मूड ठीक करने उसे फिर से उसे ट्रीट देनी पड़ती थी.

ऐसे कई मुश्किलात थे जिसके वजह से लड़का अन्ताक्षरी खेलना नहीं चाहता था.कभी किसी दिन अगर लड़के ने मना भी कर दिया अन्ताक्षरी खेलने से, तो लड़की खुद अकेले ही खेलने लगती थी.लड़का कुछ काम में उलझा रहता और लड़की चुपचाप कुछ गुनगुनाते रहती.लड़के को लगता की लड़की कोई गाना गुनगुना रही है, और वो उसपर ज्यादा ध्यान नहीं देता.जब लड़की चुप हो जाती, तो लड़का पूछता, गाना क्यों बंद कर दिया? लड़की का जवाब होता..”मैं गाना नहीं गा रही थी, हम दोनों अन्ताक्षरी खेल रहे थे न..” तुम्हारे बारी का गाना भी मैं गा रही थी, और पता है क्या…तुम हार गए, मैं जीत गयी….बस अन्ताक्षरी खत्म…”

चैट के दौरान भी लड़की ऐसे ही अन्ताक्षरी खेलती उसके साथ.लड़का जब ऑफलाइन होता तो अक्सर लड़की उसी वक्त अन्ताक्षरी खेलती थी, ताकि लड़का उसे डिस्टर्ब न करे..लड़का जब ऑनलाइन आता तो देखता मेसेज में सिर्फ गाने के बोल भरे पड़े हैं, और अंत में एक लाइन लिखा है “तुम आज फिर से हार गए…”.उसकी ऐसी नौटंकियों से लड़का खुश हो जाया करता था.वो उस वक़्त दुनिया की सारी परेशानियाँ भूल जाया करता था और सिर्फ मुस्कुराता था.

जुलाई के वो बारिश वाले दिन भी लड़का लड़की जब चैट पर थे, तो लड़की ने लड़के से जिद की अन्ताक्षरी खेलने की…शायद लड़की ने जिद कुछ ज्यादा ही कर दी थी, लड़का इस बार नाराज़ हो गया, लिखा उसने “कभी तो तुम सिरिअस हो जाओ, हमेशा बचपना”…कुछ देर तक लड़की का कोई जवाब नहीं आया, फिर कुछ देर बाद लड़की का जवाब आता है –

“देखो रूठा न करो, बात नज़रों की सुनो…हम न बोलेंगे कभी…तुम सताया न करो… :)”
“चुप रहो “
“हाय कितना क्युटली मैंने कहा था.. :'( और तुम गुस्सा हो गए? ““हाँ..”

“तो क्या बात भी नहीं करोगे मुझसे? नाराज़ होगये इतनी छोटी सी बात पर??”

“हाँ…”

“चेहरा तो लाल हुआ, क्या क्या हाल हुआ…इस अदा पर तेरी मैं तो पामाल हुआ
एच्क्युली…हुआ नहीं…हुई…मैं तो पामाल हुई!!!”

“सुनो, तुम बेकार में इतनी मेहनत कर रही हो, कुछ भी कर लो, मैं तुम्हारे साथ यहाँ चैट पर अन्ताक्षरी तो नहीं खेलने वाला..ग्रो अप!!”
“तुम बिगड़ने जो लगो और भी हसीन लगो… 🙂 “
“तुम सच में पागल हो!!”
” हाँ इसमें क्या शक है, जब तुम सामने होते हो वैसे भी मैं पगला सी जाती हूँ न….
काश तुम होते यहां, देखते मेरा ये पागलपन…
कैसे मेरे चेहरे पर ४४० वाल्ट की स्माइल आई हुई है..इतना घूमते रहते हो, कभी इधर भी आओ न?”
“हाँ जल्दी ही आयेंगे..”
“दिल…?
उप्स, सॉरी……..डील?”
“पागल हो तुम!!
हाँ डील!!! 🙂 🙂 🙂 🙂 “
“हाय!!….जान पर मेरी बनी, आपकी ठहरी हंसी..हाय मैं जान गयी…….
अब आगे तुम गाओ…”
“दीखता नहीं तुम्हे मैं कुछ काम कर रहा हूँ, और सौ बार कहा है तुमसे मैं गाना नहीं गता हूँ…”
 
“पहली बात…तुम्हारे कमरे में कोई लाईव रिकॉर्डिंग हो रहा है, मुझे कैसे पता चलेगा तुम काम कर रहे हो?
और गाना गाने को कौन कह रहा है, बस टाईप ही तो करना है…”

“मैं नहीं गाने वाला बस…चाहे जो भी कर लो आज तुम…!”
“चलो छोडो, समझ गयी तुम नहीं गाने वाले…कद्र ही कहाँ तुम्हे मेरी?
अच्छा, सुनो एक बात..”
“हाँ, कहो न..”
“कल इजाजत देखी मैंने, फिर से…शाम में तुम्हारी दी हुई साड़ी भी पहनी थी..
घुमने भी गयी…बारिश में भींगी भी..”
“अरे वाह!!!”
“हाँ और मैं बहुत सुन्दर लग रही थी उस साड़ी में.बहुत क्यूट.तुम्हे तस्वीर भेजी तो थी.
लग रही थी न मैं सुन्दर?”
“ह्म्म्म…हाँ!!”

“क्या हम्म्म हाँ?? खुल कर कहो न जी!!इसमें भी क्या इतनी कंजूसी?
तीन वर्ड्स ही तो हैं…”तुम सुन्दर हो” कह दो न, प्लीज एक बार कह दो…मेरे लिए!!”
“अच्छा ठीक है!!!”
“क्या ठीक है??”
“कुछ नहीं…”
“” कुछ नहीं?कुछ नहीं??कुछ नहीं?????
बोरिंग कहीं के…बड़े आये “कुछ नहीं” बोलने वाले..
“भूच मही”  “”
“ये ‘भूच मही’ क्या है? “
” तुम्हारे मन में आया तो तुमने मुझे “कुछ नहीं” कह दिया :/
मेरा मन आये तो मैं “भूच मही” भी नहीं कह सकती..
मेरा वर्ड है!!मैंने ईजाद किया है इसे!!! “
 
“ओफ्फ्फ!!!तुम बहुत परेसान करने लगी हो आजकल…
मैं लॉगआउट हो जाऊँगा यहाँ से…”
“धमकी मत दो तुम..खुद को सनी देओल समझ रहे हो क्या तुम?” 
“सनी देओल??”
” हाँ सनी देओल!!हर फिल्म में इतनी इतनी धमकियां देता है वो..हीरोइन को भी नहीं बख्शता!!बेचारे विलेन को डराता रहता है धमकियों से!!
तो तुम प्लीज सनी देओल मत बनो.!!धमकी मत दो!!
“तुम ये क्या बोले जा रही हो?दिमाग का वो जो पेंच ढीला था वो आख़िरकार लगता है निकल ही गया अपने जगह से और नीचे गिर गया??”
“तुम्हे क्या पता? जब मैं उदास होती हूँ और रोने का मन करता है तो ऐसे ही बे-सर पैर की बातें करती हूँ.. इललॉजिकल बातें, यु सी!!”
“अच्छा, तुम जब उदास होती तब ही इललॉजिकल बातें करती हो क्या??”
“व्हाट डू यु मीन? क्या मैं हमेशा इल्लिजिकल बातें करती हूँ?”
“अब मैं क्या जानूं?शायद??”
“डोंट एवर टॉक टू मी लाइक दिस..!!!
डोंट यु एवर टॉक टू मी!!!! आई एम सो हर्ट!!!!
आई हेट यु!!
आई हेट यु!!
आई हेट यु!! “
कुछ समय तक लड़की का जवाब नहीं आया, लड़की लेकिन अब भी ऑनलाइन थी.लड़के को लगा शायद कहीं सच में लड़की ने बुरा नहीं मान लिया हो.वो थोडा घबरा सा गया.उसने सोचा नाज़ुक सा मन है इसका कौन सी बात दिल से लगा बैठे किसे पता…बेचारे लड़के ने आखिरकार कह ही दिया –“अच्छा सुनो,न, देखो नाराज़ न हो तुम…
“हैं खुशी आज हमे, तेरे पहलू में गिरे….” देखो हमने गाना गया, तुम्हारे लिए…अब खुश न? “

लड़की का फिर भी कोई जवाब नहीं आया…

” अब भी नाराज़ हो…वैसे तुम सच में बहुत सुन्दर लग रही थी साड़ी में!!! लव यु!!! ” 

लड़की का उधर से फ़ौरन मेसेज आया…
“बदमाश, इतनी देर लगा दिए तुम? और मैं डर गयी थी कहीं तुम मेरी मजाकिया नाराजगी का बुरा तो नहीं मान गए? दस मिनट से देखो कैसे स्क्रीन को घुर रही थी मैं!!!अब राहत मिली!!!
“तो ये नाटक था तुम्हारा? “

“जी हाँ, तुमसे ये प्यार के तीन शब्द कहलवाना इतना आसन है क्या? रात भर प्लानिंग की है!! एक एक कदम फूंक फूंक कर रखा है, तब जाकर तुम्हरे ज़बान से क्यूट से ये शब्द बाहर आये हैं!!
देख लो तुम खुद,  दिल की धड़कन पर सनम, फुल सा हाथ रखो……. “


“बेशर्म…”“आई डोंट केयर…हूँ तो हूँ बेशर्म…लेकिन तुम्हे पता नहीं तुमने कितना खुश कर दिया है मुझे आज.
आज तो मैं सारा दिन नाचती रहूंगी, गाती रहूंगी, मुस्कुराती रहूंगी…”

“हाँ क्यों नहीं, मुझसे अपनी मर्ज़ी के शब्द कहलवा जो लिए तुमने….”

“हाँ नहीं तो…मान गए न हमें तुम…बड़े ‘वो’ हैं हम !!! “

Abhihttps://www.abhiwebcafe.com
इस असाधारण सी दुनिया में एक बेहद साधारण सा व्यक्ति हूँ. बस कुछ सपने के पीछे भाग रहा हूँ, देखता हूँ कब पूरे होते हैं वो...होते भी हैं या नहीं! पेशे से वेब और कंटेंट डेवलपर, और ऑनलाइन मार्केटर हूँ. प्यारी मीठी कहानियाँ लिखना शौक है.

7 COMMENTS

  1. "हाँ नहीं तो…मान गए न हमें तुम…बड़े 'वो' हैं हम !!! "
    बताओ तो ज़रा…ऐसी दिलदारिन लडकी को `आई लव यु' बोलने में इतनी देर लगाते हैं क्या…? बहुत नासमझ लड़का है तुम्हारी इस पोस्ट का…:)
    वैसे जोक्स अपार्ट…अचानक उदास थी, पर इस पोस्ट ने जादू का काम किया जैसे…पूरे टाइम चेहरे पर मुस्कराहट खिली रही…|
    ऐसी पोस्ट लिखते पढवाते रहा करो भाई…love your writings and love you bhaiya…<3

  2. ओये…देखो आज लगा ही लिया चक्कर इधर का…एक बार फिर…:D
    वैसे एक बात बताओ…ये कैसा लड़का है जी…??? लडकी इतनी प्यारी बातें करती है और वो काम में उलझा रहता है…??? :/
    हाउ बोरिंग…:P

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