Abhi

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इस असाधारण सी दुनिया में एक बेहद साधारण सा व्यक्ति हूँ. बस कुछ सपने के पीछे भाग रहा हूँ, देखता हूँ कब पूरे होते हैं वो...होते भी हैं या नहीं! पेशे से वेब और कंटेंट डेवलपर, और ऑनलाइन मार्केटर हूँ. प्यारी मीठी कहानियाँ लिखना शौक है.

दिसंबर की एक सुबह – कोहरा, चाय और उसके नखरे

सुबह जैसे ही मेरी आँखें खुली और मैंने खिड़की से बाहर देखा तो खूब घना कोहरा छाया हुआ था. मैं एकदम खुश हो गया....

वापस आओ ओ कोहरे, तुम्हारा इंतजार है

वो दिसंबर के आखिरी दिन थे और ठंड अचानक से शहर से गायब हो गयी थी. दिसंबर की धूप में मार्च की धूप का...

पुराने किले में बिता अक्टूबर का एक दिन

"मैं पुराने किताबों के अलमारी के पास चला आया..जैसे वहां कोई छिपा खज़ाना हो. हर कमरे में कितने भेद भरे कोने होते हैं, वही...

तुम्हारे नाम पर एक कविता – प्रियंका गुप्ता की तीन कवितायें

आज बेहद ख़ास दिन है मेरे लिए. आज जन्मदिन है मेरी दीदी, प्रियंका गुप्ता का. इस ब्लॉग से वो मेरे से ज्यादा जुड़ी हुई...

झील में तैरती बत्तखें

कौन ऐसा खुशनुमा दिल न होगा जिसे बारिश की रुमानियत न पसंद हो, और बात जब उस दीवानी सी प्रिया की हो, तो बारिश...

आँधी, बारिश और रिमझिम फुहारों सी यादें

सुबह के तीन बज रहे हैं. बाहर ज़ोरदार बारिश शुरू हो गयी है. बादलों की तेज़ गड़गड़ाहट से मेरी नींद एकदम से खुल गयी....

मैजिशियन

दोपहर बीत चली थी लेकिन बारिश थी कि रुकने का नाम नहीं ले रही थी. लड़का अपने कमरे में बैठे बारिश के रुकने की...

चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है

इतवार का दिन शायद यादों का दिन होता है..वरना सुबह से तुम्हारी बातें एक के बाद एक यूँ याद न आती. तुमसे बातें करने...

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दिन खाली खाली बर्तन है, और रात है जैसे अँधा कुआँ

शहर में अकेला घूमना बहुत भयंकर, बहुत कष्टदायक होता है. हमेशा एक खटका सा बना रहता है. एक अजीब किस्म का डर. शुरू शुरू...

याद है तुम्हें उन्नीस सौ अट्ठानवे का वो सर्द दिसम्बर?

तुम होती यहाँ इन दिनों तो खूब खुश होती. एकदम तुम्हारे टाइप की ठंड पड़ रही है आज कल, जैसा दिसम्बर तुम्हें पसंद है,...

सुनो, तुम अब कहानियाँ नहीं लिखना

वो जनवरी का कोई दिन रहा होगा. सुबह से बारिश हो रही थी. लड़की को वैसे तो जनवरी की बारिश खूब अच्छी लगती थी...

लव इन दिसम्बर: साड़ी, कोहरा और उतरता बुखार

"तुम पागल हो क्या? बस कुछ ही दिन बचे हैं दिसम्बर में और तुम्हें अपनी नींद की पड़ी है? ज़ुकाम की चिन्ता है? शर्म...

आ कहीं दूर चले जाएं हम, दूर इतना कि हमें छू न सके कोई ग़म

लड़की की कल्पना भी उसके जैसी ही क्यूट और यूनिक से थे. उसके सपनों और ख्वाहिशों की अपनी एक अलग ही दुनिया थी, जहाँ...