Abhi

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इस असाधारण सी दुनिया में एक बेहद साधारण सा व्यक्ति हूँ. बस कुछ सपने के पीछे भाग रहा हूँ, देखता हूँ कब पूरे होते हैं वो...होते भी हैं या नहीं! पेशे से वेब और कंटेंट डेवलपर, और ऑनलाइन मार्केटर हूँ. प्यारी मीठी कहानियाँ लिखना शौक है.

वर्ड्स – दिज वर्ड्स आर आल आई हैव टू टेक योर हार्ट अवे

दिल्ली के ग्रीन पार्क इलाके में वो एक छोटा सा कैफे था जो तुम्हें काफी पसंद था. शायद दिल्ली का सबसे पसंदीदा कैफे था...

दिसम्बर, कोहरा और उसके खेल

काफी सालों बाद इस बार दिसंबर में शहर में इस कदर कोहरा मेहरबान हुआ है, वरना कोहरे ने तो जैसे ये ठान लिया था...

कोहरे पर लिखा एक नाम

वह दिसंबर की एक सर्द सुबह थी. ठण्ड इतने कि रजाई से निकलने का मन न करे, पर जल्दी उठना लड़के की मजबूरी थी....

बारिशी मोमेंट्स

हम दोनों की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं थी. वो अक्सर कहती थी मुझसे, देखना हम दोनों के प्यार पर फ़िल्में बनेंगी और...

वे दिन, स्पेगेटी और वो दाग – [ दिल्ली डायरीज ]

ठण्ड और कोहरे से लिपटी दिल्ली की सड़कों पर जैसे जैसे टैक्सी आगे बढ़ रही थी मुझे वो तमाम दिन दिल्ली के याद आ...

आँखों में बसी हो पर दूर हो कहीं.. [दिल्ली डायरीज ]

काफी सालों बाद इस शहर में आ रहा हूँ. वैसे ज्यादा साल तो नहीं हुए, बस तीन चार साल ही तो हुए हैं अभी...

आधी नींद…अधूरे ख़्वाब और एक सुहावना सफ़र

शाम गहराने लगी थी.. दोनों टेरेस से नीचे उतर आये थे. बारिश अब जोरदार होने लगी थी. लड़की का मन तो बिलकुल नहीं था...

नदी, ख्वाहिशें और कुछ ख़्वाब अधूरे से…

रात लड़के ने होटल में नहीं बल्कि एक ट्रेन के कूपे में बिताया था. ये भी एक मजेदार किस्सा था. एक दिन पहले जब...

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दिन खाली खाली बर्तन है, और रात है जैसे अँधा कुआँ

शहर में अकेला घूमना बहुत भयंकर, बहुत कष्टदायक होता है. हमेशा एक खटका सा बना रहता है. एक अजीब किस्म का डर. शुरू शुरू...

याद है तुम्हें उन्नीस सौ अट्ठानवे का वो सर्द दिसम्बर?

तुम होती यहाँ इन दिनों तो खूब खुश होती. एकदम तुम्हारे टाइप की ठंड पड़ रही है आज कल, जैसा दिसम्बर तुम्हें पसंद है,...

सुनो, तुम अब कहानियाँ नहीं लिखना

वो जनवरी का कोई दिन रहा होगा. सुबह से बारिश हो रही थी. लड़की को वैसे तो जनवरी की बारिश खूब अच्छी लगती थी...

लव इन दिसम्बर: साड़ी, कोहरा और उतरता बुखार

"तुम पागल हो क्या? बस कुछ ही दिन बचे हैं दिसम्बर में और तुम्हें अपनी नींद की पड़ी है? ज़ुकाम की चिन्ता है? शर्म...

आ कहीं दूर चले जाएं हम, दूर इतना कि हमें छू न सके कोई ग़म

लड़की की कल्पना भी उसके जैसी ही क्यूट और यूनिक से थे. उसके सपनों और ख्वाहिशों की अपनी एक अलग ही दुनिया थी, जहाँ...