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A Day In Memories

तुम मेरे लाइटहाउस हो

चर्च...वो शाम और एक चियर्स... से  आगे...आसमान में बादल छा गए थे. सुबह की बारिश के बाद जो हलकी धूप निकली थी, अब वो मिट...

चर्च…वो शाम और एक चियर्स…

समय जैसे घूम कर फिर से वहीं आ पहुंचा है. मैं उसी बिल्डिंग के छत पर खड़ा हूँ जिस बिल्डिंग के तीसरी मंजिल पर...

दिल्ली डायरी (४)

जनवरी का ये आखिरी दिन है. मैं कॉफ़ी होम में बैठ कर कुछ तारीखें याद कर रहा हूँ. कुछ खत याद आ रहे हैं,...

वो शाम कुछ अजीब थी….

(२) वो शाम कुछ अजीब थी.. .....पार्क में बैठी हुई वो अपनी दोनों आँखें बंद कर पूरी तन्मयता से कवितायें सुन रही थी.मैं उसे कवितायें पढ़...

वो शाम कुछ अजीब थी…

वो शाम बहुत ख़ास थी...आज उस शाम को बीते कई साल हो चुके हैं लेकिन अभी भी याद ऐसे ताज़ा है की लगता है...

बारिश का एक दिन

उसे बारिश के मौसम से प्यार था.बारिशों में वो रूमानी हो जाया करती थी.शायरी और कविताओं में दिलचस्पी उसकी अचानक से बढ़ जाती और...

परफ्यूम की खुशबु

.तुम्हे परफ्यूम का बेहद शौक था न...तुम हमेशा अलग ही किस्म का एक परफ्यूम लगाती थी.तुम मुझे अक्सर उसका नाम बताया करती थी और...

मंदिर का सफ़र : २

मंदिर का सफ़र १ से आगे  बस स्टैंड से मंदिर की दुरी लगभग दो-तीन किलोमीटर की थी.मंदिर तक जाने का रास्ता एक छोटे गाँव...

मंदिर का सफ़र

वे साल के आखिरी दिन थे, उसकी एक जिद थी की वो मेरे साथ माता के मंदिर जाए, वो मंदिर जो शहर से पचास-साठ...