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मीना कुमारी की शायरी (पांच)

मेरे महबूब जब दोपहर को समुन्दर की लहरें मेरे दिल की धड़कनों से हमआहंग होकर उठती हैं तो आफ़ताब की हयात आफ़री शुआओं से मुझे तेरी जुदाई को बर्दाश्त...

वो शाम कुछ अजीब थी…

वो शाम बहुत ख़ास थी...आज उस शाम को बीते कई साल हो चुके हैं लेकिन अभी भी याद ऐसे ताज़ा है की लगता है...

कोई चाहत है न जरुरत है – मीना कुमारी की शायरी (४)

कोई चाहत है न जरुरत हैमौत क्या इतनी खूबसूरत हैमौत की गोद मिल रही हो अगरजागे रहने की क्या जरुरत हैजिंदगी गढ़ के देख...

मीना कुमारी की शायरी – पार्ट ३ — मेरा माजी

न हाथ थाम सके, न पकड़ सके दामन,बड़े करीब से उठकर चला गया कोई..मीना कुमारी जी कि कुछ शायरी आप पहले के दो पोस्ट में...

मीना कुमारी की शायरी – पार्ट 2 — टुकड़े-टुकड़े दिन बीता

सच यह तुलसी* कैसी शांत है और काश्मीर की झीलें  किस किस तरह  उथल पुथल हो जाती हैं और अल्लाह ! मैं !कुछ आजाद नगमें.... मीना कुमारी जी के...

मीना कुमारी की शायरी – पार्ट १ – चाँद तनहा है, आसमान तनहा

मसर्रत पे रिवाजों का सख्त पहरा है, ना जाने कौन सी उम्मीद पे दिल ठहरा है... तेरी आँखों में झलकते हुए इस गम की कसम, ऐ दोस्त!...

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