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Letters For You

मीट क्यूट

“मीट क्यूट?” “हाँ मीट क्यूट...” “क्या बोल रही हो? ऐसा कोई भी शब्द नहीं है..” “है...है ऐसा शब्द.. तुम्हें क्या पता. याद है हमारी शुरुआत की कुछ मुलाकातें?” “हाँ...

तुम्हारी ख्वाहिशें..२

तुम्हारी अनोखी ख्वाहिशों की लिस्ट में एक और ख्वाहिश थी...जिसे तुम लगभग हर शाम मुझे सुनाती थी. तुम्हें शब्द ईजाद करने की बीमारी आदत...

तुम्हारी ख्वाहिशें..

तुम्हें याद तो है न तुम कितनी ऊट-पटांग हरकतें कभी करने लगती थी. किसी गाने को सुनकर उसमें कही बातों को इतना सिरिअसली ले...

कुछ पल…तुम्हारे नाम…

जो लड़का देखता थावो दिसम्बर की एक सर्द सुबह थी. जिधर देखो घना कोहरा...लड़के ने खिड़की से बाहर झाँका और खुश हो गया. उसक...

स्वीट एम्बैरेसमेन्ट

मुझे लगता है कि बहुत सालों बाद भी जब भी दिल्ली या दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित कॉफ़ी हाउस का जिक्र होगा, मुझे तुम्हारी वो...

मैंने परी को देखा है..

आज से ठीक चार साल पहले की ३१ अक्टूबर की बात है..युहीं घूमते हुए एक ब्लॉग पर जा रुका था..एक कहानी सामने दिखी थी..."ज़िन्दगी...

सर्दियों की आहट और मौसम का पहला खत..तुम्हारे नाम

बहुत दिनों बाद तुम्हे आज खत लिखने बैठा हूँ...ये खत तुम्हे क्यों लिख रहा हूँ ये मैं नहीं जानता.क्या लिखूंगा इस खत में ये...

रिश्ते बस रिश्ते होते हैं

कहानी नहीं, बस कन्फ्यूज्ड हूँ, साथ बैठकर कुछ लोगों से बातें करने का मन है....थोड़ा मूड स्विंग का भी शिकार हूँ...तो ऐसे में कुछ...

तुम बिन -२-

उसके पास दुनिया के कई खूबसूरत शहरों के बारे में कई ऐसी ऐसी जानकारियां थी की लड़का हमेशा उसके इस ज्ञान से आश्चर्यचकित हो...