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Poems

चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है

इतवार का दिन शायद यादों का दिन होता है..वरना सुबह से तुम्हारी बातें एक के बाद एक यूँ याद न आती. तुमसे बातें करने...

मीना कुमारी की शायरी(पांच)

मेरे महबूब जब दोपहर को समुन्दर की लहरें मेरे दिल की धड़कनों से हमआहंग होकर उठती हैं तो आफ़ताब की हयात आफ़री शुआओं से मुझे तेरी जुदाई को बर्दाश्त...

जेब में रखी कुछ यादें

अकसर पुरानी अलमारियों में जाने कितनी यादें बंद होती हैं. उन अलमारियों को खोलना पुराने दिनों में वापस लौटना होता है, वापस उन दिनों...

टूटी हुई बिखरी हुई

शमशेर बहादुर सिंह की ये लम्बी कविता जाने कितनी बार पढ़ चूका हूँ..ये मेरी सबसे पसंदीदा कविताओं में से है!टूटी हुई बिखरी हुई चाय की...

वो शाम कुछ अजीब थी…

वो शाम बहुत ख़ास थी...आज उस शाम को बीते कई साल हो चुके हैं लेकिन अभी भी याद ऐसे ताज़ा है की लगता है...

लिखने की वजहें…

लड़का जब भी अपनी खुद की कहानियों से उबने लगता, जब उसे ये लगता की इन कहानियों को लिखकर कुछ भी हासिल नहीं होने...

ये खेल आखिर किसलिए?

मैं रोज़गार के सिलसिले में कभी कभी उसके शहर जाता हूँ तोगुज़रता हूँ उस गली सेवो नीम तरीक सी गलीऔर उसी ने नुक्कड़ पे ऊँघता...

काश

तुम खुश हो जाया करती थी मेरी हर छोटी से छोटी बातों पर मेरी बेतुकी कवितायों की भी तुम तारीफें करती नहीं थकती थी मेरी लिखी हर कविताओं...

बारिश की बुँदे

बारिश की बुँदे तुम्हारे चेहरे पे बड़ी दिलकश लगती थी बारिशों के मौसम में सोंधी मिटटी की महक और हलकी मद्धम बहती हवा तुम्हे पागल बना देती थी तुम अक्सर खो...