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Latest Articles

दिसम्बर, कोहरा और उसके खेल

काफी सालों बाद इस बार दिसंबर में शहर में इस कदर कोहरा मेहरबान हुआ है, वरना कोहरे ने तो जैसे ये ठान लिया था...

जेब में रखी कुछ यादें

अकसर पुरानी अलमारियों में जाने कितनी यादें बंद होती हैं. उन अलमारियों को खोलना पुराने दिनों में वापस लौटना होता है, वापस उन दिनों...

सपना

बहुत पहले कविता लिखने की कोशिश की थी, उस समय डाला भी था इस ब्लॉग पे...आज फिर से उसी कविता को पोस्ट कर रहा...

टूटी हुई बिखरी हुई

शमशेर बहादुर सिंह की ये लम्बी कविता जाने कितनी बार पढ़ चूका हूँ..ये मेरी सबसे पसंदीदा कविताओं में से है!टूटी हुई बिखरी हुई चाय की...

सफ़र की शुरुआत…

ज़िन्दगी की कुछ अच्छी चीज़ों की शुरुआत युहीं हो जाती है...अचानक ही. मेरे लिए लिखने की शुरुआत ऐसे ही हुई थी...एकदम रैंडमली...युहीं बातों बातों...

लिखने की वजहें…

लड़का जब भी अपनी खुद की कहानियों से उबने लगता, जब उसे ये लगता की इन कहानियों को लिखकर कुछ भी हासिल नहीं होने...

मिस्टिरीअस अक्टूबर -२-

वे अक्टूबर के दिन थे जब वो छुट्टियाँ बिताने शहर आई हुई थी.उन्ही दिनों मेरे एक करीबी रिश्तेदार की शादी तय हुई.मेरी ईच्छा थी...

होटल की एक रात

चंडीगढ़...द सिटी ब्यूटीफल अपने प्रिय मित्र की सगाई के मौके पर मैं चंडीगढ़ आया हूँ.पहली बार में ही ये शहर भा गया मुझे.चंडीगढ़ में बस ने...