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Latest Articles

आखिरी मुलाकात

अभिनव और स्नेहा के बीच जो रिश्ता था उसे सबसे अच्छी तरह अभिनव की छोटी बहन रिया ही समझ सकती थी और शायद इसलिए...

देखो रूठा न करो…

उन दोनों की जोड़ी कमाल की थी, जहाँ एक तरफ लड़का शर्मीला और कम बोलने वाला था, वहीँ दूसरी तरफ लड़की बिंदास और हमेशा...

मिस्टिरीअस अक्टूबर -२-

वे अक्टूबर के दिन थे जब वो छुट्टियाँ बिताने शहर आई हुई थी.उन्ही दिनों मेरे एक करीबी रिश्तेदार की शादी तय हुई.मेरी ईच्छा थी...

एक खाली सा दिन

सुबह के छः बज रहे थे. हमेशा की तरह आज भी वो अलार्म बजने के पहले ही जाग गया था. जाड़ों की सुबह इतनी...

वे दिन, स्पेगेटी और वो दाग – [ दिल्ली डायरीज ]

ठण्ड और कोहरे से लिपटी दिल्ली की सड़कों पर जैसे जैसे टैक्सी आगे बढ़ रही थी मुझे वो तमाम दिन दिल्ली के याद आ...

झील में तैरती बत्तखें

कौन ऐसा खुशनुमा दिल न होगा जिसे बारिश की रुमानियत न पसंद हो, और बात जब उस दीवानी सी प्रिया की हो, तो बारिश...

तुम बहुत याद आती हो

आज फिर उस पन्ने के तरफ धयान गया, जिसपर बड़े प्यार से तुमने लिखा था की "फिर मिलेंगे".. सहेज के रखा है  अब तक मैंने उस पन्ने को की...

तेरे जाने की घड़ी बड़ी सख्त घड़ी है

तुम्हारे जाने की घड़ी बहुत सख्त घड़ी होती है - ये तुम कहा करती थी. याद है न कैसे गुलज़ार साहब की इस नज़्म...